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Friday, September 11, 2020

मैं कहता आंखन देखी

संसार में आंखों से दिखाई देनी वाली प्रत्येक चीज नाशवान है.. और ये तुम्हारी नहीं हैं...ये शरीर, ये परिवार, ये दौलत-शौहरत, ये मकान-दुकान...और जो भी तुमने पास संग्रहित किया हुआ है... ये सब तुम्हारे दुनिया में आने के पहले किसी और का था ...और दुनिया से विदा हो जाने के बाद निश्चित तौर पर किसी और का हो जाएगा...यह सब किराएदारी पर तुमको मिला है....यही नहीं,  इसके बाद भी हर वो चीज तुमको मिली,  जिसकी तुमने कुदरत से इच्छा-अनिच्छा में चाहत की...क्या यह आश्चर्यजनक नहीं है कि, तुमने जब-जब जो-जो चाहा वो सब भी कुदरत ने देर-अबेर तुमको दिया..क्या यह भी सच नहीं है कि, तुमने कुदरत प्रदत्त और उसके द्वारा उपलब्ध कराई गई हर चीज पर अपना नाम लिख लिया है...जो तुम्हारी कभी थी ही नहीं...उन्हें तुमने मेरा-मेरा कहना शुरू कर दिया...क्या तुमको इसका बोध है...?

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